17 साल तक गांव में नहीं बजे थे शहनाई के सुर! फिर एक बेटी ने तोड़ी 'परग' की बेड़ियां, पूरा गांव बन गया बाराती

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17 साल तक गांव में नहीं बजे थे शहनाई के सुर! फिर एक बेटी ने तोड़ी 'परग' की बेड़ियां, पूरा गांव बन गया बाराती

ललोई (मालथौन), सागर। 17 साल... यानी 204 महीने... यानी करीब 6200 दिन।

इतने लंबे वक्त तक ललोई गांव की कोई भी बेटी अपने गांव से विदा नहीं हो सकी — क्योंकि एक कुप्रथा नाम की बेड़ी ने गांव के दरवाज़े बंद कर रखे थे।

लेकिन अब... एक बेटी ने वो बेड़ियां तोड़ दी हैं।
नाम है — मानसी गौड़।

और ये कोई आम शादी नहीं थी, ये थी सोच की विदाई और बदलाव की बारात।


💔 “परग” — वो परंपरा, जो बेटियों को पराया बनाती थी

ललोई गांव में 17 साल पहले एक अपराधिक घटना हुई थी। इसके बाद गांव ने एक 'परग' नाम की मान्यता बना ली — जिसके तहत बेटियों की शादी गांव में नहीं हो सकती थी।

  • बेटों की शादी धूमधाम से गांव में होती रही

  • पर बेटियों के लिए बना रहा गैरवाजिब प्रतिबंध

  • नतीजा? गांव की बेटियों को बाहर शादी करनी पड़ती, जिससे गरीब परिवार आर्थिक तंगी में आ जाते थे


👏 गांव ने कहा – 'बस बहुत हुआ'

जब आदिवासी परिवार की बेटी मानसी गौड़ की शादी की बात आई, तो गांव ने वही किया जो कभी सोचा भी नहीं गया था — एकजुट होकर पुरानी परंपरा को ठोकर मार दी।

  • सरपंच बादल सिंह के नेतृत्व में गांववालों ने करीब ₹3 लाख का चंदा इकट्ठा किया

  • नरसिंहगढ़ (दमोह) से बारात आई और गांव की गलियों ने खुद को सजाया

  • महिलाएं और पुरुष दोनों ने समारोह में बराबरी से भाग लिया

“पहली बार बेटी की विदाई गांव से हुई और वो भी पूरे गांव की बेटी बनकर।”


🎤 "कन्या पूजते हो, फिर भेदभाव क्यों?" – भूपेन्द्र सिंह

इस ऐतिहासिक मौके पर पहुंचे मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने मंच से कहा:

“बेटी को देवी मानते हैं, फिर यह भेदभाव क्यों?
अब वक्त है परंपरा नहीं, सोच बदलने का।”

उन्होंने वर-वधु को आशीर्वाद दिया और गांव को सामाजिक क्रांति की ओर पहला कदम बताया।


🧠 सोचिए:

  • जब कोई गांव एक बेटी की शादी के बहाने 17 साल पुरानी बेड़ी तोड़ सकता है, तो क्या बाकी समाज भी ऐसा नहीं कर सकता?

  • क्या हम सिर्फ बदलाव की बातें करेंगे या कभी उसका हिस्सा भी बनेंगे?


📌 ये सिर्फ एक शादी नहीं थी, ये था –

💍 ‘कुप्रथा का अंतिम संस्कार’
🏡 ‘गांव की सोच का नवसंस्कार’
👧 ‘बेटियों की इज्जत का ऐलान’

 

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