रायपुर से रिपोर्ट |
साहित्य की दुनिया में छत्तीसगढ़ अब केवल ‘लोककथाओं’ तक सीमित नहीं रहेगा – अब यहां से निकलेगी राष्ट्रीय स्तर की आवाज़। शुक्रवार को दिल्ली की साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और इस मुलाकात ने राज्य के साहित्यिक भविष्य की एक नई पटकथा लिख दी।
सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बड़ा संदेश था ये मुलाकात
सामान्य तौर पर ऐसी मुलाकातें रस्मी होती हैं – लेकिन इस बार मामला कुछ और था। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मिलकर न सिर्फ छत्तीसगढ़ की भाषाओं और लेखन प्रतिभा की तारीफ़ की, बल्कि यह प्रस्ताव भी रखा कि राज्य में एक भव्य राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव आयोजित किया जाए, जिसमें देशभर के दिग्गज लेखक, कवि और पाठक जुटें।
मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर तुरंत सहमति दी और कहा,
“हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का साहित्य सिर्फ पन्नों तक न रहे, बल्कि लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बने।”
युवा लिखेंगे, लोकभाषा बोलेगी – नया मिशन तय
बैठक में तीन बड़ी बातें तय हुईं:
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युवाओं को लेखन की ओर मोड़ने के लिए राज्यभर में कार्यक्रम होंगे।
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लोकभाषाओं और लोककथाओं को दस्तावेज़ और मंच मिलेगा।
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स्कूल-कॉलेजों में कविता पाठ, लेखन कार्यशाला और पुस्तक मेले जैसी गतिविधियों को नियमित किया जाएगा।
यानी अब बस्तर से लेकर सरगुजा तक, हर जिले में साहित्य की हलचल देखने को मिलेगी।
क्या छत्तीसगढ़ बनेगा साहित्य का हॉटस्पॉट?
इस मुलाकात के बाद साहित्यिक गलियारों में गूंज उठी है एक नई चर्चा—
क्या छत्तीसगढ़ अब “साहित्य का नया केंद्र” बन सकता है?
संकेत उत्साहजनक हैं।
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सरकार इच्छुक है।
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साहित्य अकादमी साथ खड़ी है।
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ज़मीनी स्तर पर काम शुरू होने वाला है।
अब सवाल सिर्फ इतना है कि कब और कैसे यह आंदोलन आकार लेगा?
लेकिन अगर यह प्लान ज़मीन पर उतरा, तो छत्तीसगढ़ वह राज्य होगा जहां एक ओर राउत नाचा गूंजेगा, और दूसरी ओर कविता पाठ की तालियों की आवाज़।
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