रायपुर, 26 जून.
26 जून 2025 को साहित्य जगत के लिए एक दुखद दिन बन गया, जब हिंदी के जाने माने हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे के निधन की खबर आई। वे लंबे समय से हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज को आईना दिखाते आ रहे थे। उनके शब्दों की धार और हास्य का संयोजन उन्हें बाकी कवियों से अलग बनाता था।
छत्तीसगढ़ के निवासी डॉ. दुबे न केवल कवि थे, बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी और वक्ता भी थे। उन्होंने कविता को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया। उनका मंचीय प्रदर्शन, उनके हाव-भाव और वाक-चातुर्य श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
उनके निधन पर राजनीतिक और साहित्यिक दोनों ही क्षेत्रों से शोक व्यक्त किया गया। देशभर के कवि, साहित्यकार और प्रशंसक उनके योगदान को याद कर रहे हैं। डॉ. सुरेंद्र दुबे भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका साहित्यिक योगदान और शब्दों की मुस्कान सदैव जीवित रहेगी।
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