रायपुर, 29 जून .
भारत सरकार की बहुप्रतीक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर योजना ‘भारतमाला परियोजना’ को लेकर छत्तीसगढ़ में हुआ मुआवजा घोटाला अब कानून के शिकंजे में आता दिख रहा है। इस घोटाले के केंद्र में छह राजस्व अधिकारी हैं, जिन्हें कोर्ट ने 29 जुलाई 2025 तक पेश होने का अंतिम मौका दिया है। यदि वे पेश नहीं होते हैं, तो उनकी संपत्तियों की कुर्की की जाएगी और गैरजमानती वारंट जारी होगा।
क्या है मामला?
रायपुर से विशाखापट्टनम तक प्रस्तावित नेशनल हाईवे के लिए ज़मीन अधिग्रहण किया गया था। इस प्रक्रिया में बड़ी धांधली की बात सामने आई है। जांच में पता चला कि:
वास्तविक मुआवजा रकम ₹29.5 करोड़ थी,
लेकिन अधिकारियों ने इसे बढ़ाकर ₹78 करोड़ दिखाया,
80 से अधिक फर्जी नामों के जरिए अधिग्रहण दर्ज किया गया,
और असली किसानों को बहुत कम मुआवजा मिला।
यह सारा खेल दलालों और अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया। दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ कर ज़मीनों को कई हिस्सों में बांटा गया, जिससे मुआवजा बढ़ाकर हड़पा जा सके।
कोर्ट की सख्ती
विशेष न्यायालय ने जिन छह अधिकारियों को नोटिस दिया है, उनमें प्रमुख नाम हैं:
निर्भय कुमार साहू (पूर्व SDM),
शशिकांत कुर्रे (तहसीलदार),
लखेश्वर प्रसाद किरण (नायब तहसीलदार),
तथा तीन पटवारी।
इन सभी को अदालत ने ‘घोषित अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अदालत की चेतावनी है कि अगली तारीख तक पेश नहीं होने पर संपत्ति जब्ती और गिरफ्तारी वारंट जारी होंगे।
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