पुरी (ओडिशा), 13 जून | द वक़्ता धार्मिक डेस्क | पुरी धाम में श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर आज एक बार फिर भक्ति, परंपरा और उत्साह से भर उठा। आगामी रथ यात्रा 2025 की तैयारियों के बीच भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का पवित्र 'स्नान उत्सव' धूमधाम से संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर तीनों देव विग्रहों को श्रद्धा के साथ 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान कराया गया, जिसे ‘महाभिषेक’ कहा जाता है। मंदिर की छतों से लेकर पुरी की गलियों तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
🛕 क्या है स्नान उत्सव की परंपरा?
‘स्नान पूर्णिमा’ के दिन आयोजित होने वाला यह पर्व, जगन्नाथ रथ यात्रा की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान को गंगा, यमुना और अन्य तीर्थों के जल से स्नान कराया जाता है ताकि वो भक्तों को दर्शन दे सकें।
"भगवान को 108 कलशों में रखे जल से स्नान कराया जाता है, जिसमें चंदन, गंध, फूल और जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं।" – श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन
🤒 स्नान के बाद भगवान ‘बीमार’ हो जाते हैं!
मान्यता है कि अत्यधिक स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन को हल्का ज्वर आ जाता है। इसे ‘अनवसर’ कहा जाता है – यानी 15 दिनों तक भगवान दर्शन नहीं देते। इस अवधि में उन्हें एक विशेष कक्ष में रखा जाता है जहां केवल सेवायत (सेवा करने वाले पुरोहित) ही सेवा कर सकते हैं।
“जैसे इंसान को बुखार के बाद विश्राम की ज़रूरत होती है, वैसे ही भगवान भी 15 दिनों तक विश्राम करते हैं।” – मुख्य पुरोहित
🚩 फिर होगा ‘नवयौवन दर्शन’, और निकलेगी रथ यात्रा
‘अनवसर’ के समापन के बाद भगवान एक नए रूप में दर्शन देते हैं जिसे ‘नवयौवन दर्शन’ कहा जाता है। इसके बाद पुरी की ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा प्रारंभ होती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।
🙏 श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, प्रशासन की अपील
पुरी जिला कलेक्टर ने श्रद्धालुओं से शांति, संयम और सुरक्षा का पालन करने की अपील की है। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, साथ ही CCTV कैमरों और पुलिस जवानों की तैनाती से व्यवस्था सुचारू रही।
भक्तों ने भगवान के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगी और भक्ति रस में डूबे नजर आए।
📸 स्नान उत्सव की झलकियां:
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भगवान के सिर पर फूलों से सजा छत्र
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पुजारियों द्वारा किया गया वेद मंत्रोच्चार
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महिलाओं ने मंगल गीत गाए
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भव्य शृंगार के बाद जलाभिषेक का दृश्य
🔔 क्या आप जानते हैं?
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स्नान उत्सव को ‘देव स्नान पूर्णिमा’ भी कहा जाता है
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यह पर्व हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है
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रथ यात्रा इस बार 29 जून 2025 को निकलेगी
🧘♂️ एक परंपरा, जो सिर्फ आस्था नहीं, संस्कृति का जीवंत रूप है।
पुरी में जगन्नाथ जी के स्नान उत्सव ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि भारत की आस्था न सिर्फ जीवित है, बल्कि समय के साथ और मजबूत होती जा रही है। रथ यात्रा की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है।
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