ब्रिक्स सम्मलेन में मोदी ने आतंकवाद पर दोहरे रवैये के लिए चीन को घेरा

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ब्रिक्स सम्मलेन में मोदी ने आतंकवाद पर दोहरे रवैये के लिए चीन को घेरा
 

रिओ डे जेनेरो, 06 जुलाई। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राज़ील में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन का नाम लिए बगैर उसे आतंकवाद पर दोहरा रवैया अपनाने और उसे पाकिस्तान की तरफ से भारत में फैलाये जा आतंकवाद का मौन समर्थन करने के लिए कड़ी आलोचना की.   

ब्राज़ील की राजधानी रिओ डे जेनेरो में आयोजित ब्रिक्स के 17 वें  शिखर सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि (दुनिया को) आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। पश्चिम के कुछ देशों द्वारा आतंकवाद के शिकार और आतंक के समर्थकों को एक ही तराजू में तौलने की प्रवृत्ति की और इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि निजी या राजनीतिक स्वार्थ के लिए, आतंकवाद को मूक सम्मति देना, आतंक या आतंकियों का साथ देना, किसी भी अवस्था में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। आतंकवाद को लेकर कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। अगर हम यह नहीं कर सकते तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या आतंकवाद के खिलाफ ल़डाई को लेकर हम गंभीर हैं भी या नहीं?

उन्होंने कहा, "आतंकवाद, आज मानवता के लिए सबसे गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। हाल ही में भारत ने एक अमानवीय और कायरतापूर्ण आतंकी हमले का सामना किया। 22 अप्रैल को, पहलगाम में हुआ आतंकी हमला, भारत की आत्मा, अस्मिता और गरिमा पर सीधा प्रहार था। यह हमला केवल भारत पर नहीं, पूरी मानवता पर आघात था। इस दुख की घड़ी में, जो मित्र देश हमारे साथ खड़े रहे, जिन्होंने समर्थन और संवेदना व्यक्त की, मैं उनका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।



भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद की निंदा हमारा ‘सिद्धांत’ होना चाहिए, केवल ‘सुविधा’ नहीं। अगर पहले यह देखेंगे कि हमला किस देश में हुआ, किसके विरुद्ध हुआ, तो यह मानवता के खिलाफ विश्वासघात होगा। वैश्विक शांति और सुरक्षा केवल एक आदर्श नहीं है,ये हम सभी के साझा हितों और भविष्य की बुनियाद है। एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में ही मानवता का विकास संभव है। इस उद्देश्य को पूरा करने में ब्रिक्स की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। 

गाज़ा में इजराइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध पर मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप तक, आज विश्व विवादों और तनावों से घिरा हुआ है। गाजा में जो मानवीय स्थिति है, वह बड़ी चिंता का कारण है।भारत का अडिग विश्वास है, कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मानवता की भलाई के लिए शांति का पथ ही एकमात्र विकल्प है।

उन्होंने कहा कि, भारत भगवान् बुद्ध और महात्मा गांधी की भूमि है। हमारे लिए युद्ध और हिंसा का कोई स्थान नहीं है। भारत हर उस प्रयास का समर्थन करता है, जो विश्व को, विभाजन और संघर्ष से बाहर निकालकर, संवाद, सहयोग और समन्वय की ओर अग्रसर करे, एकजुटता और विश्वास बढ़ाए।इस दिशा में, हम सभी मित्र देशों के साथ, सहयोग और साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

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