पुरी में स्नान पूर्णिमा का दिव्य दृश्य: गजानन बेशा में प्रकट हुए महाप्रभु, गजपति महाराज ने निभाई छेरा पन्हारा की अनोखी परंपरा

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पुरी में स्नान पूर्णिमा का दिव्य दृश्य: गजानन बेशा में प्रकट हुए महाप्रभु, गजपति महाराज ने निभाई छेरा पन्हारा की अनोखी परंपरा

पुरी धाम, जहाँ हर सांस में भक्ति है, हर धड़कन में जगन्नाथ का नाम। गुरुवार को स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का वार्षिक 'स्नान अनुष्ठान' श्रद्धा और आस्था से परिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ।

इस दिन पुरी का हर कोना संकीर्तन, शंखध्वनि और हरि नाम से गूंज उठा, जब भगवान ने 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान किया। और फिर... आस्था का वो दिव्य क्षण आया, जब महाप्रभु ने राजसी 'गजानन बेशा'—अर्थात हाथी रूप में भक्तों को दर्शन दिए।


💫 गजानन रूप में महाप्रभु का दर्शन – जब भगवान ने भक्त के प्रेम के लिए रूप बदला

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक परम भक्त गणपति भट्ट ने भगवान जगन्नाथ से गणेश रूप में दर्शन की प्रार्थना की थी। भगवान ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं को गजानन रूप में प्रकट किया। तभी से हर ज्येष्ठ पूर्णिमा को यह परंपरा निर्विघ्न रूप से निभाई जा रही है।

आज भी जब भगवान हाथी रूप में प्रकट हुए, तो हजारों भक्तों की आँखें नम हो गईं। कहीं कोई हाथ जोड़कर प्रभु को निहार रहा था, तो कहीं कोई गदगद होकर बस यही कह रहा था —
"हे नाथ, आप प्रेम के लिए खुद को भी बदल लेते हैं!"


👑 छेरा पन्हारा – जब गजपति भी बनते हैं प्रभु के सेवक

इस स्नान के उपरांत, पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देब ने श्रीनार (शाही महल) से शाही पालकी में बैठकर स्नान मंडप की ओर प्रस्थान किया। वहाँ पहुँचकर उन्होंने जगन्नाथ मंदिर की परंपरा अनुसार "छेरा पन्हारा"—प्रभु के सामने झाड़ू लगाकर सेवा का प्रतीक प्रस्तुत किया।

यह दृश्य हर साल दुनिया को सिखाता है कि ईश्वर के दरबार में राजा और रंक बराबर हैं। गजपति महाराज की विनम्रता इस बात का उदाहरण है कि सेवा ही सच्चा राजधर्म है।


🛏️ जब महाप्रभु बीमार होते हैं – अनासरा की भावुक परंपरा

स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन मंदिर के सिंहासन पर नहीं लौटते। मान्यता है कि स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। उन्हें 15 दिनों के लिए 'अनासरा' (एकांत विश्राम काल) में रखा जाता है।

इन पंद्रह दिनों में ना कोई दर्शन, ना ही कोई उत्सव। केवल भक्ति का मौन, और प्रतीक्षा। जैसे हर भक्त अपने प्रिय के स्वास्थ्य लाभ की कामना करता है, वैसे ही पुरी में हर दिल बस यही प्रार्थना करता है—
"प्रभु जल्द स्वस्थ हों, फिर रथ यात्रा में बैठकर हमें दर्शन दें।"


🌼 भावनाओं से भरा आस्था का पर्व

इस दिव्य उत्सव में ओडिशा ही नहीं, भारत और विश्व भर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे। भक्तों ने भगवान के गजानन स्वरूप के दर्शन कर साल भर की मनोकामनाएं माँगी। मंदिर परिसर से लेकर समुद्र तट तक भक्ति का महाकुंभ उमड़ पड़ा।

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