14 जून को है संकष्टी चतुर्थी: गजानन को खुश करने का सबसे शुभ योग, जानिए पूजा विधि, मंत्र और व्रत का महत्व

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14 जून को है संकष्टी चतुर्थी: गजानन को खुश करने का सबसे शुभ योग, जानिए पूजा विधि, मंत्र और व्रत का महत्व

"प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्..." – ये मंत्र सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि संकट से मुक्ति का अद्वितीय स्त्रोत है। 14 जून को पड़ रही संकष्टी चतुर्थी पर अगर विधिपूर्वक गणपति बप्पा की पूजा की जाए, तो जीवन से हर बाधा, विघ्न और संकट दूर हो सकते हैं। इस बार की संकष्टी चतुर्थी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है — जो गणपति उपासना को अत्यंत प्रभावशाली बना देता है।


🗓️ संकष्टी चतुर्थी तिथि और समय:

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 जून, दोपहर 3:46 बजे

  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 जून, दोपहर 3:51 बजे


🙏 संकष्टी चतुर्थी का महात्म्य:

  • इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान गणेश संकटों को हरते हैं, आयु, बुद्धि, सुख और सफलता प्रदान करते हैं।

  • नारद पुराण और धर्मशास्त्र के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन के सभी कष्ट और रुकावटें दूर होती हैं।


🧘‍♂️ कैसे करें पूजा? (पूजा विधि):

पंडित विनय त्रिपाठी (काशी, ज्योतिषाचार्य) के अनुसार:

1. स्नान और शुद्धता:

  • गणेश जी की मूर्ति को गंगाजल या पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, जल) से स्नान कराएं।

2. श्रृंगार:

  • सिंदूर और देसी घी का लेप करें।

  • रोली, मौली, अक्षत, इत्र, जनेऊ, अबीर-बुक्का चढ़ाएं।

3. भोग और अर्पण:

  • मोदक, केला, हलवा, और दूध से बने पकवान चढ़ाएं।

  • गेंदा या गुड़हल की माला और 3, 11 या 21 दूब घास अवश्य चढ़ाएं।

4. दीप और पाठ:

  • घी का दीपक जलाएं।

  • पढ़ें:

    • गणेश चालीसा

    • संकट नाशक स्त्रोत

    • नारद पुराण का संकष्ट मंत्र:

“प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये॥”

(पूरा द्वादश नाम स्तोत्र भी पढ़ें – जिसमें वक्रतुण्ड से लेकर गजानन तक 12 नामों का महत्व है)


🧿 इस दिन क्या न करें:

  • घर में कलह या विवाद से बचें

  • बिना नहाए पूजा न करें

  • मांस, मदिरा या तामसिक भोजन से परहेज करें

  • चंद्रमा को न देखें (यदि संकष्टी चतुर्थी चंद्रदर्शन वर्जित हो)


🌙 चंद्रदर्शन और व्रत का पारण:

  • रात्रि को चंद्रमा को अर्घ्य अर्पण करने के बाद व्रत का पारण करें।

  • “ॐ सोमाय नमः” का जप करते हुए दूध, शक्कर या जल से अर्घ्य दें।


संकष्टी चतुर्थी के लाभ:

  • दांपत्य सुख

  • करियर में उन्नति

  • बच्चों की पढ़ाई में सफलता

  • मानसिक शांति

  • आर्थिक परेशानियों से मुक्ति


📿 गणेश जी के प्रिय मंत्र:

  • “ॐ गं गणपतये नमः”

  • “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ...”

  • “गणानां त्वा गणपतिं हवामहे...”


🔔 क्या कहते हैं धर्मगुरु?

“गणेश जी का नाम लेने मात्र से विघ्न दूर होते हैं। लेकिन संकष्टी चतुर्थी पर उनकी पूजा हजार गुना फल देती है।” – पं. विनय त्रिपाठी


📢 आपके लिए खास सुझाव:

अगर आप चाहते हैं कि जीवन में शुभता बनी रहे, तो इस चतुर्थी पर संकल्प लें कि हर महीने गणपति का व्रत करेंगे। संकट तो आएंगे, लेकिन गणेशजी से जीतने की शक्ति मिलेगी।

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